चंद पंक्तियों में
एक व्यक्ति, फिर व्यक्तियों का समूह।
अनेक समूह, फिर एक जाति।
अनेक जाति, फिर एक समाज।
अनेक समाज, फिर एक कस्बा।
अनेक कस्बे, फिर एक गांव।
अनेक गांव, फिर एक शहर।
अनेक शहर, फिर एक जिला।
अनेक जिले फिर एक प्रदेश।
अनेक प्रदेश, फिर एक देश।
अनेक देश, फिर एक विश्व।
अनेक विश्व, फिर एक आकाशगंगा।
अनेक आकाशगंगायें, फिर एक सौर मंडल।
और सौर मंडल का कोई अंत नहीं।
और इस सौर मंडल में उपस्थित
पंच तत्वों से बना एक व्यक्ति।
यह व्यक्ति का विस्तार है
जिसे हम ब्रम्हांड कहते हैं