आज मैं उड़ा हूं उस रफ्तार से
जो प्रकाश की गति से भी ज्यादा तेज है
आज मैं उड़ा हूं उस रफ्तार से
जो इंसान की सोच से भी ज्यादा तेज है
आकाश के बीच लहराता हुआ
उसी रफ्तार से उड़ता हुआ
न जाने किस गहरी सोच में डूबा हुआ
आज मैं उड़ा हूं न जाने किस रफ्तार से
उस आसमान की बुलंदियों को छूने के लिए
उनसे भी उंचा उड़ने की चाह लेकर
आज मैं उड़ा हूं इस समस्त ब्रम्हांड को
अपनी दोनों बाहों में समेट लेने के लिए
आज मैं उड़ा हूं न जाने किस गति से
neat…keep it up
By: Ranu Jain on सितम्बर 13, 2009
at 5:21 पूर्वाह्न