एक दिन
स्वप्न में प्रकृति
मानवीय रूप
धारण करके आई
और बोली,
ये क्या
तुम सो रहे हो
उठो पुत्र
तुम्हें तो जागना होगा
प्रकृति के
करीब आना होगा
यदि
तुम ही सो गये
तो इस दुनिया को
नई दिशा कौन देगा
दुनिया को
प्रकृति की सुन्दरता से
कौन परिचित कराएगा।
तुम्हें तो दुनिया को
नई दिशा देना है
और तुम सो रहे हो,
इसलिए उठो
और मेरे करीब आओ
मैं तुम्हें जीवन के
नए-२ अनुभव कराऊंगी
मैं तुम्हें जीवन की
यथार्थता से परिचित कराऊंगी।
प्रकृति और मानव के बीच
संबंध बताऊंगी
पर यह सब जानने के लिए
तुम्हें जागना होगा
इसलिए उठो और मेरे करीब आओ
यदि तुम ही सो गये
तो इन मानवों की सोई हुई
आत्माओं को कौन जगाएगा
मानवों के विचारों में
नई क्रांति कौन लाएगा
मनुष्य को स्वयं के स्वार्थ से
उन्हें कौन परिचित कराएगा।
दुनिया को प्रेम और एकता का
पाठ कौन पढ़ाएगा।
इसलिए उठो पुत्र जागो
और मेरे करीब आओ
ताकि मैं
तुम्हें जीवन के
एक नए संघर्ष
के लिए
तैयार कर सकूं।