मुझे तलाश है
मां की गोद की
ममता के आंचल की
शक्ति के हाथों की
मुझे तलाश है
उस समय की
जिसमें मेरी मां
मेरे सिर को
अपनी गोद में रखकर
आंचल रूपी छांव में
शक्ति रूपी हाथों से
संवारेगी
मुझे तलाश है
उस समय की
जब मैं सारी दुनिया
को भूलकर
अपनी मां की गोद में
सो जाउंगा
और खो जाउंगा
अपनी उस दुनिया में
जिसकी तलाश मैं
बरसों से करता
आ रहा हूं
हे इ्रश्वर
मेरी तलाश
कब खत्म होगी
कब आएगी
ये प्रकृति मेरी
मां के रूप में
मेरे सामने
जब मैं अपने सपनों को
साकार करूंगा
ताकि मैं इस
सांसारिक बंधनों से
मुक्त हो सकूं
sir,…. lagta hai….. aapko.. apni ‘ma’ se bahut hi jyada pyar karte hai………….
ma sabse mahan hoti hai,
wo kisi devi jaisi nahi balki
devi uske saman hoti hai.
By: Ashutosh tripathi on सितम्बर 27, 2008
at 9:17 पूर्वाह्न