अब तो कुछ सोचने की
भी इच्छा नहीं होती।
केवल हंसने को जी चाहता है।
बहुत सोचता था मैं अब से पहले
पर अब मुस्कुराने को
जी चाहता है।
बहुत से गम है इस दुनिया में
अब तो हर गम में से भी
खुशी ढूंढने को जी चाहता है।
बहुत समझाया मुझे लोगों ने
पर अब कुछ न समझने को
जी चाहता है।
सबने कर ली अपनी मनमानी
पर अब किसी की नहीं सुनना
अब तो केवल अपनी और सिर्फ केवल
अपनी ही सुनने को
जी चाहता है।
सलाहें देने को तो बहुत उठते हैं
कदम आगे
अब हर बढते हुए कदम को
रोक देने को
जी चाहता है।
बहुत जीया हूं
दूसरों को तरीकों से
अब जीवन के हर पल को
अपने तरीके से
जीने को
जी चाहता है।