सपनों में रहना तो
हमने भी सीखा था खभी
मगर अब यथार्थ में जीने की
आदत सी हो गयी है
हमने भी चाहा था की
महफिलों में रहेंगे सदा
मगर अब तन्हाई में रहने की
आदत सी हो गयी है
हमने भी चाहा था की
केवल बसंत में ही निकलेंगे
हम घर से बहार
मगर अब तपती धुप में चलने की
आदत सी हो गयी है
हमें क्या पता था
अकेले ही चलना होगा
जीवन की इस अनजान डगर पर
हम भी अपने लिए कोई
हमसफ़र ढूंढ लेते
मगर अब तो इस डगर पर भी
अकेले ही चलने की
आदत सी हो गयी है