आज चल रहा है
मेरे मन में
एक अजीब सा द्वंद्व
उन भावनाओं को लेकर
जो मनुष्य के जीवन को
न जाने कितनी तरह से
प्रभावित करती हैं।
आज फिर
एक और अनसुलझी
हुई उलझन
मुझसे टकरा गई
और दे गई
न जाने कितने सवाल
मुझे सुलझाने के लिए
जिनकी न तो कोई
शुरूआत है
और न ही कोई अंत है
सवाल
जो इतने अनसुलझे है
कि इनका हल शायद ही
कहीं हो
क्योंकि ये सवाल छुपे हैं
मानव की उन भावनाओं में
जो अदृश्य हैं